Ram Setu Ram Setu kya hai aur se kisne banaya hai रामसेतु क्या है और इसे किसने बनाया है?


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रामसेतु राम सेतु क्या है

भारत और श्रीलंका को जोड़ने वाली एक लकीर जिसे रामसेतु या एडम ब्रिज के नाम से जाना जाता है रामसेतु भारत के  तमिलनाडु के रामेश्वरम के धनुष्कोटी से प्रारंभ होकर श्रीलंका के मन्नार दीप पर जाकर मिलता है इस ब्रिज की  कुल लंबाई 48 किलोमीटर है इस 48 किलोमीटर के अंतर्गत 8 बड़े बड़े शिलालेख और कुछ छोटे शिलालेख हैं इस इस क्षेत्र में समुद्र का पानी काफी कम है समुद्र का पानी कम होने के कारण यहां पर किसी भी बड़े जहाज का निकल पाना संभव नहीं है केवल मच्छर मछुआरे अपनी छोटी छोटी नौकाओं को लेकर ही यहां पर मछली पकड़ने के लिए निकल पाते हैं इस दीप का पानी इस ब्रिज के आसपास बालू बालू काफी ऊपर सतह पर स्थित है इस कारण यहां पर आसानी से जमीन की सतह को देखा जा सकता है और यहां पर इस समतल जमीन पर चला भी जा सकता है

रामसेतु क्या है |what is ramsetu in hindi

रामसेतु का पौराणिक महत्व

रामसेतु के बारे में ऐसा कहा जाता है की रामायण जो की संस्कृत में लिखी गई है मैं इसका वर्णन मिलता है कि भगवान राम के द्वारा लंकापति रावण से अपनी पत्नी अपनी भार्या को वापस लाने के लिए भारत से लंका के बीच समुद्र पर  वानरों के द्वारा एक  पुल या एक सेतु का निर्माण किया गया था इस निर्माण को वानर सेना में उपस्थित नल और नील नाम के  दो वानर जिनको की ब्रह्मा का वरदान था कि वह कोई भी वस्तु पानी या समुद्र में डालेंगे वह द डूबेगी नहीं अतः नल नील को इस ब्रिज का निर्माण का कार्य दिया गया और उनके द्वारा यह राम सेतु का निर्माण किया गया जिस पर से भगवान श्री राम अपनी सेना सहित लंका पहुंचकर रावण को परास्त कर अपनी अपनी भार्या सीता को लेकर वापस अयोध्या आए थे

रामसेतु का वैज्ञानिक महत्व

रामसेतु या एडम ब्रिज को अभी तक लोग एक काल्पनिक मानते थे किंतु अभी हाल ही में नासा द्वारा सेटेलाइट से ली गई तस्वीरों का अध्ययन करने पर यह बात सामने निकलकर आई कि इस पुल का निर्माण लगभग 4000 वर्ष पूर्व हुआ है और यह किसी मानव द्वारा निर्मित पहला पुल है इस कारण ही इसको एडम ब्रिज का नाम दिया गया है एक और नासा द्वारा इस स्कूल के बारे में यही स्थिति के बारे में जो तथ्य पेश किए गए हैं उसके आधार पर पौराणिक कथा रामायण को लोग काल्पनिक कथा मानते थे उन लोगों को इस पर सोचने के लिए विवश किया गया है इसके अलावा इस एडम रेजिया रामसेतु का अपना एक महत्व है इसके आसपास यह आठ शिलालेखों की श्रंखला है वह इन दोनों देशों को आने वाले सुनामी यह चक्र बातों से बचाने का कार्य करती है साथ ही यहां पर समुद्र का पानी काफी धीमी गति से बहता है या यूं कहें कि यहां पर लहरों की जो रफ्तार है वह काफी कम है जिस कारण यहां पर चक्रवाती तूफान या सुनामी आने का खतरा काफी कम हो जाता है

FAQ

श्री राम को समुद्र में राम सेतु बांधने के लिए किसने कहा था?

रामायण में सेतु के निर्माण किस का विस्तृत वर्णन दिया गया है जिसके अनुसार भगवान जब यह पता चलता है कि माता सीता का हरण लंका पति रावण द्वारा किया गया है और रावण की यह सोने की लंका बीच समुद्र के बीच में एक दीप पर स्थित है अतः वह समुद्र तट रामेश्वरम वर्तमान में जो रामेश्वरम वहां पहुंचकर समुद्र पार करने के बारे में मंथन किया जाता है इस दौरान समुद्र देवता से भी प्रार्थना की जाती है कि वह हमें मार्ग प्रदान करें जिससे कि वह लंका पहुंचकर पहुंचकर अपनी भार्या को रावण की कैद से मुक्त करा कर और रावण को उसके किए का दंड देकर वापस लौट आऊंगा किंतु समुद्र द्वारा भगवान राम की प्रार्थना को अनसुना करने पर एक एक बाण से सारे समुद्र को सुखा देने का का प्रण लेते हैं तभी भयभीत होकर समुद्र देवता समुद्र से बाहर आकर श्री राम से विनती करते हैं कि हे प्रभु अगर आप अपने एक चमत्कारी बाण से इस समुद्र को सुखा देंगे तो सारे संसार में हाहाकार हो जाएगा पता मैं आपको बताता हूं कि आपकी सेना में दो वानर नल और नील है जिन्हें ब्रह्मा जी का वरदान है कि वह कोई भी वस्तु समुद्र या पानी में डालेंगे वह डूबेगी नहीं तैरती रहेगी अतः आप उन दोनों को मेरे ऊपर अच्छा समुद्र के ऊपर एक पुल निर्माण के लिए कहें जिससे आप उस पुल की सहायता से उस पार जा सकेंगे समुद्र देवता के कहे अनुसार श्री राम ने नल और नील को समुद्र के ऊपर एक सेतु निर्माण हेतु कहा सेतु निर्माण होने के बाद समुद्र पार कर जाने के लिए एवं सेतु निर्माण की प्रारंभिक सूजन के लिए श्री राम के द्वारा एक पंडित की व्यवस्था करने हेतु कहा गया और रामायण में ऐसा वर्णन किया गया है कि रावण द्वारा स्थिति की पूजन अर्थात शिशु के पास स्थित भगवान शिव के शिवलिंग आज हम रामेश्वरम शिवलिंग के नाम से जानते हैं भगवान श्री राम के द्वारा स्थापित किया गया और रावण द्वारा इस शिवलिंग की स्थापना और पूजन करवाई गई।

रामसेतु को बनाने के समय किस पंडित ने शिलान्यास विधि संपन्न कराया था?

समुद्र देवता के कहे अनुसार श्री राम ने नल और नील को समुद्र के ऊपर एक सेतु निर्माण हेतु कहा सेतु निर्माण होने के बाद समुद्र पार कर जाने के लिए एवं सेतु निर्माण की प्रारंभिक पूजन के लिए श्री राम के द्वारा एक पंडित की व्यवस्था करने हेतु कहा गया और रामायण में ऐसा वर्णन किया गया है कि रावण जो एक राजा के साथ ब्राह्मण भी था वह अपने ब्राह्मण धर्म का पालन करते हुए रामसेतु पर भगवान राम के द्वारा स्थापित शिवलिंग की पूजन एवं अभिषेक हेतु आकर राम सेतु का शिलान्यास एवं भगवान शिव का अभिषेक करवाया वही शिवलिंग आज रामेश्वर शिवलिंग के नाम से जाना जाता है जो कि रामसेतु बंधन के समय भगवान श्री राम के द्वारा स्थापित किया गया था और रावण द्वारा इस शिवलिंग की स्थापना और पूजन करवाई गई।

राम सेतु निर्माण होने के बाद किस ब्राह्मण से पूजा कराया गया है?

सेतु निर्माण की प्रारंभिक पूजन के लिए श्री राम के द्वारा एक पंडित की व्यवस्था करने हेतु कहा गया और रामायण में ऐसा वर्णन किया गया है कि रावण जो एक राजा के साथ ब्राह्मण भी था वह अपने ब्राह्मण धर्म का पालन करते हुए रामसेतु पर भगवान राम के द्वारा स्थापित शिवलिंग की पूजन एवं अभिषेक हेतु आकर राम सेतु का शिलान्यास एवं भगवान शिव का अभिषेक करवाया वही शिवलिंग आज रामेश्वर शिवलिंग के नाम से जाना जाता है जो कि रामसेतु बंधन के समय भगवान श्री राम के द्वारा स्थापित किया गया था  और रावण द्वारा इस शिवलिंग की स्थापना और पूजन करवाई गई।

यदि सेतु मानव निर्मित है तो राम तो भगवान थे भगवान निर्मित क्यों नहीं है?

यह सही है की राम सेतु का निर्माण मानव द्वारा निर्मित है और इसीलिए इसको एडम ब्रिज के नाम से भी जाना जाता है और यह भी सत्य है कि उसने इस सेतु का निर्माण भगवान राम के समय में किया गया था इसके निर्माण में वानरों का एवं मनुष्यों का विशेष योगदान रहा है उस समय भगवान राम जो कि एक मानव रूप में अवतरित हुए थे इसलिए वह अपने किसी भी अलौकिक शक्ति का प्रयोग इस पुल के निर्माण में नहीं कर सकते थे इस कारण इस पुल के निर्माण में उनकी सेना में उपस्थित दो बार नल नल और नील जिन्हें कि यह वरदान प्राप्त था कि वह कोई भी वस्तु समुद्र में फेंक देंगे तो वह डूबेगी नहीं उनको इस पुल के निर्माण हेतु कहा गया और श्री राम जो कि मानव रूप में उस समय इस पृथ्वी पर करे थे उन्होंने एक मानव के रूप में इस पुल के निर्माण की संपूर्ण कार्य योजना तैयार की और दोनों ही वानरों ने उन्हीं के दिए निर्देश अनुसार पुल का निर्माण किया इस कारण इस पुल को भगवान निर्मित ना कहकर मानव निर्मित कहा जाता है

क्या रामसेतु की पूजा कर सकती हैं?

क्योंकि रामसेतु मानव द्वारा निर्मित फुल है इस कारण से एडम ब्रिज भी कहा जाता है और स्कूल पर स्थित भगवान शिव जो कि श्रीराम द्वारा स्थापित किए गए हैं एवं रावण द्वारा जिन की स्थापना करवाई गई है तथा भगवान शिव के वहां स्थापित होने के कारण उसकी पूजा किया जाना उचित होगा

क्या राम सेतु अधर है या धरातल से जुड़कर निर्मित है?

रामसेतु कर्नाटक के रामेश्वरम के धनुष्कोटी से लेकर श्रीलंका के मन्नार दीप तक निर्मित एक 8 शिलालेख खंडों द्वारा निर्मित पुल है इन शिलाखंड का धरातल पर रखे होने का प्रमाण मिलता है एवं वहां पर धरातल काफी काफी ऊपर है इस कारण वहां पर समुद्र का पानी भी काफी कम होने के कारण वहां लहरों की गति भी काफी कम है एवं वहां पर आसानी से उन खंडों को पानी के अंदर जमीनी सतह पर स्थित देखा जा सकता है अतः यह कहना गलत है कि रामसेतु आधर है यह धरातल से जुड़ा हुआ जुड़कर बना हुआ रामसेतु पुल है

राम सेतु बनाने में कौन से जवानों का योगदान महत्वपूर्ण था?

राम सेतु का निर्माण समुद्र देवता के कहे अनुसार कि आप श्री राम की वानर सेना में दो नल और नील हैं जिनको की ब्रह्मा का वरदान प्राप्त है कि वह कोई भी वस्तु समुद्र या पानी में डालेंगे तो वह डूबेगी नहीं वह तैरती रहेगी अतः ब्रह्म जी एवं समुद्र देवता के कहे अनुसार श्रीराम के निर्देश पर वानरों द्वारा एवं नल नील के निर्देश में राम सेतु पुल का निर्माण किया गया जिसमें सभी वानरों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है

रामसेतु या एडम ब्रिज का विवरण  detail of Ram Setu ya Adam Bridge

Ram Setu ya Adam Bridge

1.नाम :-रामसेतु या एडम ब्रिज

2. निर्माण :- लगभग 4000 वर्ष पूर्व

3.निर्माणकर्ता:- रामायण या पौराणिक मान्यता अनुसार का निर्माण दो वानर नल और नील द्वारा किया गया है

4.वैज्ञानिक पद्धति अनुसार मानव द्वारा निर्मित होने से इसका नाम एडम ब्रिज रखा गया है

5.लंबाई:- 48 किलोमीटर है

6.निर्माण की स्थिति :-शिलालेखों द्वारा  शीला खंडों की संख्या 8 है

7. सेतु का प्रारंभ और अंत :- प्रारंभ भारत में धनुष्कोटी से शुरू होकर लगभग 48 किलोमीटर के बाद श्रीलंका के मन्नार दीप पर जाकर मिलता है श्रीलंका के मन्नार दीप पर समुद्र का पानी की स्थिति पानी काफी ऊपर जमीनी सतह पर स्थित है यहां पर समुद्र की लहरें काफी कम मात्रा में बहती है

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