क्या नाबालिक बच्चे को कोई दुकान दार मोबाइल फोन बेच सकता है? ।Kya Nabalik Bachche Ko Koi Dukandaar Mobile Phone Bech Sakta Hai.


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मोबाइल फोन का हमारी जिंदगी में एक विशेष योगदान है वह एक घर के सदस्य की तरह हमारे साथ रहता है आप तो यह हाल हो गया है कि हम उसके बिना अधूरा सा महसूस करते हैं हमारे आस पास यदि मोबाइल ना हो तो हम बेचैन हो जाते हैं और ना चाहते हुए भी हम उसकी ओर आकर्षित होकर उसे अपने मनोरंजन के लिए उपयोग करने लगते हैं मोबाइल का ज्यादा उपयोग करना सेहत के साथ-साथ मानसिक तौर पर भी काफी खतरनाक साबित हुआ है. मोबाइल खरीदने के लिए जब भी हम किसी दुकानदार के पास जाते हैं तो मोबाइल लेने के लिए साथ साथ हमें एक सिम भी लेना होती है और सिम लेने के लिए हमें अपना वोटर आईडी आधार कार्ड जैसे शासकीय दस्तावेजों को प्रस्तुत करना होता है क्योंकि नाबालिक बच्चों के वोटर कार्ड नहीं बनाए जाते एवं उनके दस्तावेज शासकीय तौर पर बैलेंस नहीं होने के कारण कोई भी दुकानदार नाबालिक बच्चों को अपनी दुकान से मोबाइल नहींबेच सकता

12th class से पहले बच्चों को मोबाइल लेना चाहिए या नहीं?

चुकी 12वीं क्लास के बच्चे अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण शिक्षा के पड़ाव पर होते हैं इस दौरान उन्हें यह निर्णय करना होता है कि वह किस लाइन में अर्थात किस सब्जेक्ट के माध्यम से आगे बढ़ना चाहते हैं जैसे कि यदि कोई इंजीनियरिंग करना चाहता है तो उसे पीटीईटी देना होती है और यदि कोई मेडिकल लाइन में जाना चाहता है तो उसको पीएमटी की तैयारी करना होती है और यदि किसी को शासकीय प्रशासनिक सेवा कैसे आई एस आई एफ एस आदि में जाना चाहता है तो उसे पीएससी की तैयारी के लिए प्रिपेयर होना होता है ऐसे समय में यदि बच्चों के हाथ में मोबाइल दे दिया जाए तो वह अपने लक्ष्य से भटक जाते हैं इसलिए सभी विशेषज्ञों का कहना है कि ट्वेल्थ क्लास अर्थात 12वीं के बाद बच्चों को मोबाइल नहीं देना चाहिए या अगर मोबाइल उनको उपयोग में दिया भी गया है तो उसका एक सीमित उपयोग करने को कहा जाए जिससे कि वह अपने लक्ष्य को पाने से ना भटके क्योंकि यह समय वह अमूल्य समय होता है जब बच्चे को अपने भविष्य का निर्णय एवं अपनी सोच समझ का परिचय देने का समय होता है

नेत्रहीन बच्चों की शिक्षा में मोबाइल से ऑडियो शिक्षा कहां तक उचित है?

नेत्रहीन बच्चे या ब्लाइंडनेस चाय की शिक्षा एक विशेष प्रकार की शिक्षा के शिक्षा होती है जिसके अंतर्गत उनको ब्रेन लिपि अर्थात छूकर पहचानने वाली शिक्षा के द्वारा उनको शिक्षित किया जाता है किंतु मोबाइल के आ जाने से ऐसे बच्चों के लिए ए मोबाइल का मोबाइल द्वारा ऑडियो सुना कर शिक्षा प्राप्त करना एक बेहतर उपाय है जिससे उनके मस्तिष्क में सुनने की स्मरण शक्ति प्रशक्ति के कारण वह अपने अन्य विषयों को अच्छी तरीके से याद कर पाएंगे एवं साथी उसको समझ पाएंगे किंतु केवल ऑडियो के आधार पर ही मोबाइल का उपयोग करना उचित नहीं है इनके साथ ही साथ इनको ब्रेल लिपि सरकर पहचानने वाली शिक्षा का भी उतना ही महत्व है कितना की अन्य शिक्षा जिसे ऑडियो सुनाकर किया जाना है इसके अतिरिक्त मोबाइल का उपयोग गूगल वॉइस के रूप में भी ब्लाइंडनेस जन नेत्रहीन बच्चों के अपने विषयों से संबंधित सवालों के जवाब देने के लिए भी किया जा सकता है.

कोरोना काल में बिना मोबाइल के बच्चों को कैसे पढ़ाया जाए?

करो ना कॉल या कोविड-19 इस समय में सभी के लिए काफी कष्ट दे रहा है इस दौरान जहां आमजन अपने घरों में कैद हो गए हैं वहीं बच्चों का भी स्कूल ना लगने के कारण उनके मानसिक एवं शारीरिक दोनों ही ग्रुप से काफी कुछ नुकसान हुआ है इस दौरान जहां स्कूल ना लगने के कारण बच्चों का अपनी पढ़ाई के प्रति मन ना लगना एक विशेष कारण है इस दौरान बाहर न खेल पाने के कारण उनका अपने घर पर मोबाइल में दिनभर व्यस्त रहना उनकी शिक्षा और शारीरिक एवं मानसिक गतिविधियों में अवरोध उत्पन्न करता है इस दौरान बच्चे दिन भर अपने मोबाइल में वीडियो गेम यूट्यूब आदि चैनलों पर ना जाने कितने प्रकार के कांटेक्ट देखते रहते हैं इससे बच्चों के विकास में काफी असर पड़ता है कोरोना काल के दौरान अपने बच्चों को बिना मोबाइल के कैसे पढ़ाया जाए इस बारे में सभी विशेषज्ञों का अलग-अलग मत है किंतु सभी विशेषज्ञों की एक ही रहेगी इस दौरान अपने सभी पेरेंट्स या माता-पिता को अपने बच्चे के साथ शारीरिक रूप से निकल एक्टिविटी में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेना चाहिए एवं उसको अबूझ पहेली या कुछ फिजिकल गेम खेलकर उसको नॉलेज देना चाहिए यह सूचित करना चाहिए एवं साथी उसको व्यवहारिक शिक्षा देना विशेषकर उन सभी से मिलना बातचीत करना घर के कार्य करना यह सिखाया जाना चाहिए जो कि किसी स्कूल यह किसी की मृत्यु शंकर नहीं सुधारा जा सकता है इस समय पेरेंट्स को अपने बच्चे का माता पिता के साथ-साथ एक गुरु के रूप में भी कार्य करना चाहिए जिससे कि अपने बच्चे का मानसिक बौद्धिक एवं शारीरिक विकास संपूर्ण रूप से हो सके।

कोरोना काल बच्चों द्वारा मोबाइल का दुरुपयोग स्पीच हिंदी में

करुणा काल के दौरान जहां सभी लोग अपने अपने घरों में बैठे रहे वहीं बच्चों द्वारा भी घर पर रहकर इस समय मोबाइल का दुरुपयोग किया गया बच्चों द्वारा मोबाइल पर लगातार युटुब फेसबुक यूट्यूब आदि पर अनेकों कि आने वाले कांटेक्ट देखे गए एवं उस पर लगातार कई घंटों तक वीडियो गेम गेम खेले गए जिससे उनके नजरों का देखने नजरों की रोशनी कम होना एवं मानसिक तनाव होना चिड़चिड़ापन होना एवं भूख प्यास ना लगना आदि जैसे लक्षण इस कोरोना काल के दौरान बच्चों में दिखाई दिए हैं कई पेंट्स द्वारा अपने बच्चों को बार-बार मोबाइल चलाने से रोकने पर वह उग्र हो गए और चिड़चिड़ापन में अनावश्यक अपने आप को हानि पहुंचाने लगे कई बार तो ऐसा भी देखने में आया है कि कई बच्चों को मोबाइल ना देने पर वह कुछ गलत कदम भी उठा लेते हैं यह सब एक मोबाइल की लत लग जाने के कारण ही हो पाया है अतः इस दौरान सभी पेरेंट्स को अपने बच्चों के साथ में फिजिकल इसमें रहकर उनके बौद्धिक एवं मानसिक विकास को बढ़ाने में सहयोग करना चाहिए उनको मोबाइल से दूर रखने का पूर्ण प्रयास करना चाहिए

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