2021रक्षा बंधन कब है|2021 raksha bandhan kab hai


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2021रक्षा बंधन कब है2021 raksha bandhan kab hai

हिन्दू धर्म मे विभिन्न त्योहारों का प्रचलन है इन्ही में से एक रक्षाबधन भी है रक्षाबधन का त्योहार प्रत्येक वर्ष श्रावणमास की पुर्णिमा तिथि को मनाया जाता हैं इस बार 3अगस्त 2020 दिन सोमबार को पूर्णिमा तिथि है। भाई बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक है।रक्षाबधन के दिन एक बहन अपने भाई की हाथ की कलाई पर एक रक्षासूत्र बँधती है और अपने भाई की लंम्बी उम्र की कामना करती है और भाई भी इस रक्षासूत्र के पवित्र बंधन में बांधकर अपनी बहन की हर परिस्थिति में रक्षा करने का वचन देता हैं।

रक्षाबधन क्यो मनाया जाता हैं Raksha Bandhan Kyo Manaya Jata Hai.

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रक्षाबधन के दिन एक बहन अपने भाई की हाथ की कलाई पर एक रक्षासूत्र बँधती है और अपने भाई की लंम्बी उम्र की कामना करती है और भाई भी इस रक्षासूत्र के पवित्र बंधन में बांधकर अपनी बहन की हर परिस्थिति में रक्षा करने का वचन देता हैं।

रक्षाबधन का पौराणिक महत्व क्या है Raksha Bandhan Ka Poorani Mehatav Kya Hai.

रक्षाबधन का अपना एक पौराणिक महत्व है ऐसा कहा जाता हैं कि जब महाभारत काल मे भगवान श्री कृष्ण को द्रोपदी द्वारा प्रथम बारअपने आँचल को फाड़कर रक्षासूत्र के रूप में बाधा था और श्री कृष्ण ने द्रौपदी को उनकी रक्षा करने का वचन दिया जो कि उन्होंने द्रौपती चीरहरण के समय द्रोपदी की लाज बचाकर पुर्ण किया

रक्षाबधन के दिन क्या करना चाहिए Raksha Bandhan Ke Din Kya Karna Chahiye.

इस दिन सुबह नहाकर भगवान की पूजन मंत्रोच्चारण से या सामान्य रूप में करना चाहिए और प्रथम रक्षा सूत्र भगवान को बंधना चाहिए और उनसे विनती करना चाहिए कि आप हमारी हमेशा रक्षा करे फिर सभी बहन अपने भाई को घर पर चोक या रंगोली बनाकर उस पर पटा या चौकी रख कर उस पर अपने भाई को बिठाकर उसको तिलक चंदन चावल लगाकर रक्षा सूत्र बाधना चाहिए और उसकी आरती करनी चाहिए।

रक्षाबधन का शुभ महूर्त Raksha Bandhan Ka Subh Muhurat

रक्षाबंधन 2021 मैं इस बार 22 अगस्त दिन रविवार को मनाया जाना है और रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त प्रातः काल 6:00 बजे से लेकर शाम के 6:00 बजे तक उत्तम मुहूर्त है इस मुहूर्त में बहन अपने भाई की लंबी आयु के साथ रक्षा बंधन का रक्षा सूत्र भाई की कलाई पर बांधने की एवं तिलक कर उसकी आरती उतारे की एवं ब्राह्मणों में कुछ लोग श्रावणी संस्कार भी करते हैं इस श्रावणी संस्कार के अंतर्गत वह अपना पुराना जनों को नवीन जने उस से बदलकर श्रावणी संस्कार पूर्ण करते हैं।

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